गरीब और अमीर दोस्त की कहानी | Poor and Rich Friends Moral Story in Hindi
Poor and Rich Friends Moral Story in Hindi
एक छोटे से शहर में दो लड़के रहते थे — राहुल और अमन। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त थे। फर्क सिर्फ इतना था कि राहुल एक गरीब परिवार से था, जबकि अमन एक अमीर व्यापारी का बेटा था।राहुल के पिता एक छोटी-सी दुकान चलाते थे और बड़ी मुश्किल से घर का खर्च चल पाता था। वहीं अमन के पास अच्छे कपड़े, महँगा बैग और हर तरह की सुविधाएँ थीं।
स्कूल में दोनों साथ बैठते, साथ खेलते और साथ पढ़ते थे। राहुल अक्सर अपना साधारण टिफिन लाता, जिसमें सूखी रोटी और सब्जी होती, जबकि अमन का टिफिन रंग-बिरंगे खाने से भरा रहता। लेकिन अमन कभी राहुल को नीचा नहीं दिखाता था। वह खुशी-खुशी अपना टिफिन राहुल के साथ बाँट लेता और कहता,
“दोस्ती में अमीरी-गरीबी नहीं देखी जाती।”
समय बीतता गया। एक दिन स्कूल में विज्ञान प्रतियोगिता की घोषणा हुई। दोनों दोस्तों ने साथ में भाग लेने का फैसला किया। राहुल बहुत मेहनती था और पढ़ाई में तेज़ भी, लेकिन उसके पास प्रोजेक्ट बनाने के लिए अच्छे सामान नहीं थे।
अमन ने बिना देर किए कहा,
“तू चिंता मत कर, जो भी सामान चाहिए मैं ले आऊँगा। जीत हम दोनों की होगी।”
दोनों ने मिलकर दिन-रात मेहनत की और प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। स्कूल में सबने उनकी दोस्ती और मेहनत की तारीफ की।
कुछ साल बाद स्कूल खत्म हो गया। अमन शहर के बड़े कॉलेज में चला गया, जबकि राहुल पैसों की कमी की वजह से पढ़ाई छोड़कर पिता की दुकान पर काम करने लगा। धीरे-धीरे समय और हालात ने दोनों को अलग कर दिया।
अमन की ज़िंदगी आराम और ऐश में बीत रही थी, जबकि राहुल संघर्ष करता रहा।
कई साल बाद अचानक राहुल के पिता बहुत बीमार पड़ गए। इलाज के लिए बहुत पैसे चाहिए थे। राहुल ने हर जगह कोशिश की, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। मजबूरी में उसने अमन को फोन किया।
फोन उठते ही अमन की आवाज़ सुनकर राहुल की आँखें भर आईं। उसने अपनी हालत बताई।
अमन ने बिना एक पल सोचे कहा,
“राहुल, दोस्ती का रिश्ता वक्त से कमजोर नहीं होता। मैं अभी आ रहा हूँ।”
अगले ही दिन अमन अस्पताल पहुँचा। उसने इलाज का पूरा खर्च उठाया और राहुल के पिता की जान बच गई।
राहुल रोते हुए बोला,
“अमन, आज तुमने साबित कर दिया कि सच्चा दोस्त वही होता है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा हो।”
अमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
“अगर तू उस दिन मेरा टिफिन न बाँटता, मेरे साथ मेहनत न करता, तो शायद आज मैं भी ऐसा इंसान न होता। दोस्ती हमेशा बराबरी की होती है, पैसे की नहीं।”
कुछ समय बाद अमन ने राहुल को अपने व्यापार में साझेदार बना लिया। राहुल की मेहनत और ईमानदारी से व्यापार और भी आगे बढ़ा। दोनों फिर से साथ काम करने लगे — इस बार पहले से ज्यादा मजबूत दोस्ती के साथ।
🌱 कहानी की सीख (Moral of the Story)
सच्ची दोस्ती अमीरी-गरीबी नहीं देखती। जो दोस्त मुश्किल वक्त में साथ दे, वही असली दोस्त होता है।
पैसा आ सकता है और जा सकता है, लेकिन सच्ची मित्रता हमेशा रहती है।
